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Showing posts from August, 2018
*मेरी उमीदों का मीनार कुछ् यू गिरा पड़ा था, हर शख्स उससे ईट उठाता चला गया था, कोई फ़रेब होता तो भी सभल मै जाता, हर आदमी वहाँ अपना क़रीब का था,* Abhi.
*अब जो बिछड़े फिर न मिलेगे , टूटी आस जगाओ ना, जाने कितने दिन बीते है ,अब तो याद भी आये ना, बातो बातो में ही अक्शर , जिक्र तेरा छिड़ जाये ना, जाने किन् बातो पे रूठे, ये तो मुझे बताओ ना, बहुत हूई है रुसवाई तेरा साथ निभाने में,अब तो वापस आ जाओ, मेरे इस घर आँगन में*।। Abhi.
*ये मुनासिब नही बढ़ गए फासले, दर्द हो ना किसी को तो और बात क्या,आप अपने घरों में करो रोशनी, घर किसी का जले आपको उससे क्या,* Abhi