*अब जो बिछड़े फिर न मिलेगे , टूटी आस जगाओ ना, जाने कितने दिन बीते है ,अब तो याद भी आये ना, बातो बातो में ही अक्शर , जिक्र तेरा छिड़ जाये ना, जाने किन् बातो पे रूठे, ये तो मुझे बताओ ना, बहुत हूई है रुसवाई तेरा साथ निभाने में,अब तो वापस आ जाओ, मेरे इस घर आँगन में*।। Abhi.
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